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रोग क्यों?

रोग क्यों? रोग क्यों?  स्वस्थता को चाहते हुए भी हम स्वस्थ क्यों नहीं होते? अतः हमें उन सभी कारणों की जानकारी आवश्यक है, जो हमें रोगी बनाने में सहायक बनते हैं। रोग होने के अनेक कारण होते हैं। जैसे पूर्व जन्म के संचित असाता वेदनीय कर्मो का उदय, पैतृक संस्कार और वंशानुगत रोग, आकस्मिक दुर्घटनाएँ, आस–पास का बाह्य प्रदूषित वातावरण, …

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स्वास्थ्यवर्धक जीवन शैली

स्वास्थ्यवर्धक जीवन शैली    शरीर, मन और आत्मा को विकारों से मुक्त रख, अपने जीवन के लक्ष्य को पाने के लिये, प्रत्येक चिन्तनशील मानव को यथा संभव पूर्ण सजगता एवं विवेक के साथ, प्रकृति के सनातन सिद्धान्तों का पालन कर, अपने आपका संतुलन रखना चाहिए। पुस्तक के प्रत्येक अध्याय में ऐसी आवश्यक बातों की विस्तार से चर्चा की गई है। …

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अहिंसक जीवन शैली हेतु जीव-अजीव के भेद का ज्ञान आवश्यक?

अहिंसक जीवन शैली हेतु जीव–अजीव के भेद का ज्ञान आवश्यक?   हिंसा हेतु वर्तमान परिस्थितियों को दोष देना उचित नहीं:-  जीवन जीना भी एक कला हैं। मानव जीवन का परम लक्ष्य क्या? उसको कैसे प्राप्त किया जाए? जीवन की प्राथमिकताएँ क्या हो? क्या वर्तमान परिस्थितियों में अहिंसा का पालन संभव है? जहाँ जीवन है वहाँ हिंसा अनिवार्य है। अल्पतम अतिआवश्यक …

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स्वास्थ्य हेतु शरीर, मन और आत्मा का तालमेल आवश्यक

स्वास्थ्य हेतु शरीर, मन और आत्मा का तालमेल आवश्यक बिना कारण कार्य नहीं होता  आधुनिक वैज्ञानिकों द्वारा मान्य सर्वसम्मत वैज्ञानिक सिद्धान्त है कि बिना कारण कोई कार्य नहीं होता। प्रत्येक कार्य अथवा घटना के पीछे प्रत्यक्ष या परोक्ष कुछ न कुछ कारण अवश्य होते हैं। बिना कारण कुछ भी घटित नहीं हो सकता। हमें जो मनुष्य की योनि के साथ …

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बिना दवा दमा का प्रभावशाली उपचार

बिना दवा दमा का प्रभावशाली उपचार   स्वास्थ्य हेतु सही श्वसन क्रिया आवश्यक–  यदि किसी भिखारी को लाखों रुपये देने के बदले दस से पन्द्रह मिनट तक श्वास रोकने के लिये कहते है तो वह उसके लिये तैयार नहीं होता। ऐसी अमूल्य श्वसन क्रिया हमारे स्वयं के द्वारा जन्म से अनवरत संचालित होती है। परन्तु हम उसका महत्त्व नहीं समझते। …

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बिना दवा हृदय रोगों का प्रभावशाली उपचार

बिना दवा हृदय रोगों का प्रभावशाली उपचार    मानव शरीर दुनिया की सर्वश्रेष्ठ मषीनरी है। यदि शरीर के किसी भी भाग में कोई तीक्ष्ण कांटा, सुई अथवा पिन चुभ जाए तो उस समय न तो आंख को अच्छे से अच्छा दृश्य देखना अच्छा लगता है और न कानों को मन पसन्द गीत सुनना। यहां तक दुनिया भर में चक्कर लगाने …

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नेत्र रोगों का बिना दवा उपचार

नेत्र रोगों का बिना दवा उपचार    आजकल आंखों के रोग बहुत बढ़ रहे हैं। आंखों के रोगों का कारण अपौष्टिक आहार, धूल भरा प्रदूषित वातावरण, तेज प्रकाश में देखना, कम प्रकाश में पढ़ना, लगातार टी.वी. देखना, बात–बात में आंसू निकालना, नेत्र रोगियों से संक्रमण, कम्प्यूटर पर अधिक कार्य करने के अलावा क्षमता से अधिक आंखों पर जोर देकर कार्य लेना …

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बिना दवा मधुमेह का प्रभावशाली उपचार

बिना दवा मधुमेह का प्रभावशाली उपचार   मधुमेह का कारणः–   शरीर को स्वस्थ रखने एवं समुचित विकास हेतु भोजन में अन्य तत्त्वों के साथ संतुलित प्रोटीन, वसा तथा कार्बोहाइट्रेड आदि तत्त्वों की विशेष आवश्यकता होती है। जब इनमें से कोई भी या सारे तत्त्व शरीर को संतुलित मात्रा में भोजन में नहीं मिलते अथवा शरीर उन्हें पाचन के पश्चात् पूर्ण …

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प्रभावशाली स्वावलम्बी चिकित्सा पद्धतियों के प्रति स्वास्थ्य मंत्रालय कितना सजग?

प्रभावशाली स्वावलम्बी चिकित्सा पद्धतियों के प्रति स्वास्थ्य मंत्रालय कितना सजग?   स्वास्थ्य मंत्रालय का कर्त्तव्य–  जब किसी चिकित्सा पद्धति को सरकारी मान्यता देने का प्रश्न उठाया जाता है तो उन्हें हमारा स्वास्थ्य मंत्रालय प्रायः बिना सोचे–समझे, बिना अध्ययन एवं शोध किये अवैज्ञानिक बतलाकर नकार देता है। स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रभारी अधिकारी न तो उसमें कार्यरत विशेषज्ञों से विचार–विमर्श करना आवश्यक समझते …

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स्वावलंबी चिकित्सा पद्धतियाँ क्यों विश्वसनीय?

स्वावलंबी चिकित्सा पद्धतियाँ क्यों विश्वसनीय?   क्या स्वास्थ्य हेतु समान मापदण्डों का निर्धारण संभव है?  दुनियां में कोई भी दो व्यक्ति सम्पूर्ण रूप से एक जैसे नहीं हो सकते। उनके जीवन का लक्ष्य, प्राथमिकताएँ, खान–पान, रहन–सहन, आचार–विचार, आवास एवं व्यवसाय का वातावरण तथा परिस्थितियाँ, बाह्य रूप से कुछ लक्षणों में समानता होने के बावजूद किसी एक रोग के नाम से …

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वैकल्पिक चिकित्सा कौनसी?: अहिंसक अथवा हिंसक?

वैकल्पिक चिकित्सा कौनसी?: अहिंसक अथवा हिंसक?   मानव शरीर दुनियाँ की सर्वश्रेष्ठ मशीनरीः–                 मानव शरीर दुनियाँ की सर्वश्रेष्ठ मशीनरी है। अमूल्य अंगों, उपांगों, इन्द्रियों, मन, मस्तिष्क और विभिन्न अवयवों द्वारा निर्मित मानव जीवन का संचालन और नियंत्रण कौन करता है? यह आज भी वैज्ञानिकों के लिए शोध का विशय है। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विज्ञान के विकास एवं लम्बे–चौड़े दावों …

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अच्छी चिकित्सा पद्धति कौनसी?

अच्छी चिकित्सा पद्धति कौनसी?   अच्छे स्वास्थ्य हेतु निम्नतम आवश्यकताएँ-                 स्वस्थ जीवन जीने के लिए शरीर, मन और आत्मा, तीनों की स्वस्थता आवश्यक होती है। तीनों एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं। तीनों के विकारों को दूर कर तथा सन्तुलित रख आपसी तालमेल द्वारा ही स्थायी स्वास्थ्य को प्राप्त किया जा सकता है। अतः स्वास्थ्य की चर्चा करते समय जहाँ …

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क्या स्वास्थ्य के प्रति हमारा दृष्टिकोण वैज्ञानिक है?

क्या स्वास्थ्य के प्रति हमारा दृष्टिकोण वैज्ञानिक है? अच्छी चिकित्सा पद्धति के मापदण्ड:-                 अच्छी चिकित्सा पद्धति शरीर को आरोग्य ही नहीं निरोग रखती है अर्थात् जिससे शरीर में रोग उत्पन्न ही न हो। रोग उत्पन्न होने का कारण आधि (मानसिक), व्याधि (शारीरिक), उपाधि (आत्मिक अथवा कर्मजन्य) का असंतुलन होता है। अतः अच्छी चिकित्सा पद्धति में तीनों को संतुलित रख …

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क्या हम अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग हैं?

क्या हम अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग हैं?   क्या शरीर में रोग अकेला आ सकता है?                 यदि हमारे शरीर के किसी भाग में कोई तीक्ष्ण वस्तु जैसे कांच, काँटा, सुई, पिन आदि चुभे तो सारे शरीर में छटपटाहट हो जाती है। आँखों में पानी आने लगता है, मुँह से चीख निकलने लगती है। शरीर की सारी इन्द्रियाँ एवं …

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स्वस्थ रहना स्वयं पर निर्भर करता है

स्वस्थ रहना स्वयं पर निर्भर करता है                 “पहला सुख निरोगी काया” जानते, मानते और आवश्यक होते हुए भी आज मानव प्रायः कितना स्वस्थ एवम् सुखी है? यह जनसाधारण से छिपा हुआ नहीं है। प्रत्येक मनुष्य जीवन-पर्यन्त स्वस्थ रहना चाहता है। परन्तु चाहने मात्र से तो स्वास्थ्य प्राप्त नहीं हो जाता। मृत्यु निश्चित …

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स्वास्थ्य हेतु स्वयं की सजगता आवश्यक

स्वास्थ्य हेतु स्वयं की सजगता आवश्यक                 पहला सुख निरोगी काया जानते-मानते और आवश्यक होते हुए भी आज का मानव कितना स्वस्थ एवं सुखी है?  यह जनसाधारण से छिपा हुआ नहीं है। प्रत्येक मनुष्य जीवन पर्यन्त स्वस्थ रहना चाहता है, परन्तु चाहने मात्र से तो स्वास्थ्य प्राप्त नहीं हो जाता। मृत्यु निश्चित है। जन्म के साथ आयुष्य के रूप में …

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स्वस्थ जीवन क्या है?

स्वस्थ जीवन क्या है? जीवन क्या है?                 जन्म और मृत्यु के बीच की अवस्था का नाम जीवन है। जीवन को समझने से पूर्व जन्म और मृत्यु के कारणों को समझना आवश्यक होता है। जिसके कारण हमारा जीव विभिन्न योनियों में भ्रमण करता है। जन्म और मृत्यु क्यों? कब? कैसे और कहाँ होती है? उसका संचालन और नियन्त्रण कौन और …

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शरीर में स्वयं रोग मुक्त होने की क्षमता होती है

शरीर में स्वयं रोग मुक्त होने की क्षमता होती है रोग का मूल अज्ञान-                 रोग की तीन अवस्थाएँ होती हैं- शारीरिक, मानसिक और आत्मिक। जिस अवस्था का रोग होता है उसके अनुरूप यदि उपचार नहीं किया जाता है तो रोग से मुक्ति सम्भव नहीं होती। आजकल अधिकांश व्यक्ति मानसिक और आत्मिक रोगों को तो रोग मानते ही नहीं, क्योंकि …

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मानव शरीर स्वयं में परिपूर्ण

मानव शरीर स्वयं में परिपूर्ण मानव का शरीर दुनियाँ की श्रेष्ठतम मशीन                 मानव शरीर की संरचना विश्व का एक अद्भुत आश्चर्य है। उसके रहस्य को दुनियां का बड़े से बड़ा डाॅक्टर और वैज्ञानिक पूर्ण रूप से समझने में असमर्थ है। शरीर के ऊपर यदि त्वचा न होती तो हमारी कैसी स्थिति होती? क्या हमने कभी कल्पना की? मस्तिष्क जैसा …

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क्या स्वास्थ्य हेतु समान मापदण्डों का निर्धारण सम्भव है?

क्या स्वास्थ्य हेतु समान मापदण्डों का निर्धारण सम्भव है?                 दुनियाँ में कोई भी दो व्यक्ति सम्पूर्ण रूप से एक जैसे नहीं हो सकते हैं? तब दो रोगी एक जैसे कैसे हो सकते हैं? बाह्य लक्षणों में समानता लगने के बावजूद सहयोगी परोक्ष रोगों का परिवार अलग-अलग होता है। क्या उनके जीवन का लक्ष्य, प्राथमिकताएँ, कत्र्तव्य, आवश्यकताएँ, समस्याएँ आदि एक …

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क्या उपचार हेतु हिंसा उचित हैं?

क्या उपचार हेतु हिंसा उचित हैं? राहत ही पूर्ण उपचार नहीं होताः-                 आज उपचार के नाम पर रोग के कारणों को दूर करने के बजाय अपने-अपने सिद्धान्तों के आधार पर रोग के लक्षण मिटाने का प्रयास हो रहा है। उपचार में समग्र दृष्टिकोण का अभाव होने से तथा रोग का मूल कारण पता लगाये बिना उपचार किया जा रहा …

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अध्यात्म की उपेक्षा करने वाला स्वास्थ्य विज्ञान अपूर्ण

अध्यात्म की उपेक्षा करने वाला स्वास्थ्य विज्ञान अपूर्ण                 आज भौतिक विज्ञान के चमत्कारों से प्रभावित अधिकांश व्यक्ति वैज्ञानिक तथ्यों को ही सुनना, मानना, समझना और ग्रहण करना पसंद करते हैं, भले ही वे विज्ञान के मौलिक सिद्धान्तों से अपरिचित ही क्यों न हों। इसी कारण आज सनातन सिद्धान्तों की उपेक्षा विज्ञान के नाम पर हो रही है। आधुनिक स्वास्थ्य …

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स्वास्थ्य हेतु आत्मा की उपेक्षा क्यों?

स्वास्थ्य हेतु आत्मा की उपेक्षा क्यों? स्वास्थ्य हेतु शरीर को प्राथमिकता क्यों?                 स्वस्थ जीवन जीने के लिए शरीर को महत्त्व देने का प्रथम कारण तो यह है कि रोग से पड़ने वाले प्रभावों का निरीक्षण, परीक्षण, अभिव्यक्ति एवं कष्ट का अनुभव शरीर से ही होता है। अतः जनसाधारण की प्राथमिकता भी पहले शरीर को रोग-मुक्त, कष्ट-मुक्त करने की होती …

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राग-द्वेष् का मूल कारण

राग-द्वेष रोग का मूल दुःख-रोग का मूल-                 जीवन में सुख-दुःख आते जाते रहते हैं। दुख के कारण व्यक्ति में चिन्ता, तनाव, निराशा, भय, अधीरता, नकारात्मक सोच, चिड़चिड़ापन, घबराहट आदि संवेदनाओं के लक्षण प्रकट होने लगते हैं। परिणाम स्वरूप शरीर को ऊर्जा देने वाले चक्र तथा हारमोन्स बनाने वाली अन्तःश्रावी ग्रन्थियों की कार्य-प्रणाली एवं अन्य अवयव बनाने वाली शारीरिक क्रियाएँ …

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कर्मो से प्रभावित हमारा स्वास्थ्य

कर्मो से प्रभावित हमारा स्वास्थ्य स्वस्थ कौन?                  स्वस्थता तन, मन और आत्मोत्साह के समन्वय का नाम है। जब शरीर, मन, इन्द्रियाँ और आत्मा ताल से ताल मिला कर सन्तुलन से कार्य करते हैं, तब ही अच्छा स्वास्थ्य कहलाता है।                 स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है कि मन और पाँचों इन्द्रियाँ सशक्त हो। स्मरण शक्ति अच्छी हो। क्षमताओं का ज्ञान …

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आत्मशुद्धि स्वास्थ्य की सर्वोच्च आवश्यकता

आत्मशुद्धि स्वास्थ्य की सर्वोच्च आवश्यकता                 आत्म-शुद्धि जीवन की सर्वोच्च आवश्यकता है परन्तु आज जीवन शैली का निर्धारण करते समय तथा स्वास्थ्य के सम्बन्ध में परामर्श देते समय प्रायः अधिकांश चिकित्सा पद्धतियों और चिकित्सकों की सोच मात्र शरीर तक ही सीमित होता है। इसमें कोई संदेह नहीं कि हमारी गतिविधियाँ के संचालन में शरीर की प्रमुख भूमिका होती है। सभी …

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प्राण ऊर्जा का संतुलन ही स्वास्थ्य

प्राण ऊर्जा का संतुलन ही स्वास्थ्य प्राण ऊर्जा क्या है?                 संसार में दो तत्त्व मुख्य हैं। प्रथम जीव, आत्मा और चेतना एवं दूसरा अजीव, जड़ या अचेतन। इन तत्त्वों से ही सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की संरचना होती है। इसी आधार पर ऊर्जा को भी मोटे रूप में दो भागों में विभाजित किया जा सकता है। पहली चैतन्य अथवा प्राण ऊर्जा …

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क्या स्वास्थ्य के लिये सम्यक् दर्शन आवश्यक है?

क्या स्वास्थ्य के लिये सम्यक् दर्शन आवश्यक है? स्वस्थ कौन?                 स्वास्थ्य का मतलब है- स्व में स्थित हो जाना अर्थात अपने निज स्वरूप में आ जाना या विभाव अवस्था से स्वभाव में आ जाना। जैसे अग्नि के सम्पर्क से पानी गरम हो जाता है, उबलने लगता है। परन्तु जैसे ही अग्नि से उसको अलग करते हैं, धीरे-धीरे वह ठण्डा …

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स्वास्थ्य का मूलाधार: संयमित जीवन शैली

स्वास्थ्य का मूलाधार: संयमित जीवन शैली मानव जीवन क्या है?                 जन्म और मृत्यु के बीच की अवस्था का नाम जीवन है। जीवन को समझने से पूर्व जन्म और मृत्यु के कारणों को समझना आवश्यक होता है। जिसके कारण हमारा जीव विभिन्न योनियों में भ्रमण करता है। जन्म और मृत्यु क्यों? कब? कैसे और कहाँ होती है? उसका संचालन और …

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रोग हमारा मित्र है शत्रु नहीं

रोग हमारा मित्र है शत्रु नहीं रोग कब होते हैं?                 उपचार से पूर्व यह जानना और समझना आवश्यक है कि रोग क्या है? रोग क्यों, कब और कैसे होता है? उसके प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष कारण क्या हैं? शरीर की रोग प्रतिरात्मक शक्ति कैसे बढ़ती हैं? और क्यों कम होती है? उसके सहायक और विरोधी तत्व क्या हैं? क्या शारीरिक रोगों …

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प्रभावशाली स्वावलम्बी लीवर शुद्धिकरण चिकित्सा-(Liver Cleansing Therapy)

प्रभावशाली स्वावलम्बी लीवर शुद्धिकरण चिकित्सा (Liver Cleansing Therapy) स्वावलम्बी चिकित्सा क्यों प्रभावशाली?                 विकार रोगों का मूल होता है। जितने ज्यादा विकार होते हैं, व्यक्ति उतना ही रोग ग्रस्त होता है। शरीर में जमे विकारों के कारण शरीर, मानसिक विकारों के कारण मन और आत्मिक विकारों के कारण आत्मा विकारग्रस्त हो जाती है। आत्मा, मन एवं शरीर की विकार मुक्त …

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रोग अनेक – समाधान सिर्फ एक

रोग अनेक – समाधान सिर्फ एक                 शरीर में रोग होने के कारणों में से इलैक्ट्रोनिक उपकरणों से निकलने वाले Radiations का दुष्प्रभाव भी एक प्रमुख कारण होता है। मोबाइल, टी.वी., एक्स-रे, इन्टरनेट, कम्प्युटर आदि उपकरणों के बढ़ते उपयोग एवं उनको संचालित करने वाले टावरों के कारण वायुमण्डल में फैले इस प्रदूषण का नियन्त्रण जनसाधारण के हाथ में नहीं है। …

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स्फटिक (क्रिस्टल)का स्वास्थ्य पर प्रभाव

स्फटिक (क्रिस्टल)का स्वास्थ्य पर प्रभाव स्फटिक (क्रिस्टल) क्या है?                 स्फटिक क्वार्टज़ वर्ग का विशिष्ठ गुणों वाला पारदर्शक खनिज पत्थर होता है। रासायनिक दृष्टि से यह सिलिका तथा आक्सीजन का योगिक होता है। अपनी विशेष प्रकार की बाह्य, आंतरिक एवं रासायनिक संरचना के कारण इससे निकलने वाली प्रकाश और रंग की किरणें अत्यधिक प्रभावशाली होती है। इसमें ऊर्जा को उत्पन्न …

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क्या वाणी स्वास्थ्य को प्रभावित करती है?

क्या वाणी स्वास्थ्य को प्रभावित करती है?                 भावों, विचारों, अभिव्यक्ति एवं संवाद का सशक्त माध्यम है-वाणी। विचार जब तक मन में रहते हैं, भाव कहलाते हैं, परन्तु जब वे वाणी के माध्यम से अभिव्यक्त हो जाते हैं, तो सार्वजनिक हो जाते हैं। मनुष्य ही एक ऐसा प्राणी है, जिसको मन के साथ-साथ वाणी की प्राप्ति होती है। मधुर वाणी …

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क्या वास्तु शास्त्र का सिद्धान्त वैज्ञानिक है?

क्या वास्तु शास्त्र का सिद्धान्त वैज्ञानिक है? क्या भवन उसका उपयोग करने वालों को प्रभावित करता हैः-                 कभी-कभी सारे प्रयास सही रूप से करने के बावजूद जीवन में बार-बार अनचाहे अनहोनी घटनाएँ घटित होती है। पूर्ण सजगता विवेक एवं परिश्रम से कार्य करने के बावजूद सफलता के स्थान पर विफलताएँ मिलती है। घर में परिवार के सदस्यों में आपसी …

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क्या स्वस्थता के लिये प्राण ऊर्जा का सन्तुलन आवश्यक है?

क्या स्वस्थता के लिये प्राण ऊर्जा का सन्तुलन आवश्यक है?         मानव जीवन का संचालन आज भी विज्ञान के लिये आश्चर्य बना हुआ है। हमारे शरीर में जो क्रियायें अथवा प्रतिक्रियायें होती है उसका संचालन एवं नियन्त्रण कौन और कैसे करता है? क्या हमारे जन्म समय पर ग्रह एवं नक्षत्रों की ब्रह्माण्ड में स्थिति के आधार पर ज्योतिषियों द्वारा बनायी …

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क्या है रेकी चिकित्सा?

क्या है रेकी चिकित्सा?                               रेकी ब्रह्माण्ड में उपलब्ध चैतन्य शक्ति की तरंगों को शरीर में सुव्यवस्थित ढंग से प्रवाहित करने की सरल प्रक्रिया है, जिसके द्वारा शरीर, मन एवं आत्मा को सन्तुलित कर सम्पूर्ण स्वास्थ्य, प्रसन्नता, समृद्धि प्राप्त की जा सकती है। रेकी एक जापानी शब्द है, जिसका मतलब होता है, यूनिवर्सल …

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महावीर का स्वास्थ्य चिन्तन

महावीर का स्वास्थ्य चिन्तन आत्म दर्शन स्वास्थ्य का मूलाधारः-                 महावीर का दर्शन मौलिक रूप से स्वास्थ्य और चिकित्सा का दर्शन नहीं है, वह तो आत्मा से आत्मा का दर्शन है। परन्तु जब तक आत्मा मोक्ष को प्राप्त नहीं हो जाती तब तक, आत्मा शरीर के बिना रह नहीं सकती। शरीर की उपेक्षा कर आत्म-शुद्धि हेतु साधना भी नहीं की …

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मांसाहार स्वास्थ्य के लिए हानिकारक

मांसाहार स्वास्थ्य के लिए हानिकारक                 अज्ञान सभी दुःखों का मूल है। अज्ञान के कारण ही मानव सद्चिन्तन से अलग हो अपना भला-बुरा सोचने में असमर्थ है तथा मन एवम् इन्द्रियों का गुलाम बन लक्ष्यहीन जीवन जी रहा है। विज्ञान की दुहाई देने वाले सत्य को जानते एवं मानते हुए भी नकार रहे हैं। उनका जीवन प्रदर्शन, विज्ञापन एवं शीघ्रातिशीघ्र …

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क्या बुद्धिमान व्यक्ति मांसाहारी हो सकता है?

क्या बुद्धिमान व्यक्ति मांसाहारी हो सकता है?   मानवीय गुणों के अभाव में मानव जीवन निरर्थक:-                 मानवीय गुणों के अभाव में मनुष्य और पशु में विशेष अन्तर नहीं होता। दया, करूणा, मैत्री, सेवा, परोपकार, अनुकंपा, नैतिकता, सहानुभूति, कत्र्तव्य पालन का विवेक मानवता का प्रतीक है। इन गुणों से शून्य मनुष्य तो मानवता के अभाव में स्वार्थी एवं अनैतिक जीवन …

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स्वास्थ्य के अनुकूल हमारी दिनचर्या कैसी हो?

स्वास्थ्य के अनुकूल हमारी दिनचर्या कैसी हो? उचित समय पर किया गया कार्य अधिक लाभदायक होता है-                   सूर्य प्रतिदिन प्रातःकाल में उदय होकर, सायंकाल को ही क्यों अस्त होता है? निद्रा का समय रात्रि में ही क्यों उपयुक्त होता हैं? प्रातःकाल ही प्रायः अधिकांश व्यक्ति मल-त्याग क्यों करते हैं? भ्रमण एवं श्वसन सम्बन्धी व्यायामों अथवा प्राणायाम प्रातः ही क्यों …

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जल का उपयोग कब

जल का उपयोग कब, क्यों, कितना और कैसे करें? शरीर में जल के कार्य:-                 हवा के पश्चात् शरीर में दूसरी सबसे बड़ी आवश्यकता पानी की होती है। पानी के बिना जीवन लम्बे समय तक नहीं चल सकता। शरीर में लगभग दो तिहाई भाग पानी का होता है। शरीर के अलग-अलग भागों में पानी की आवश्यकता भी अलग-अलग होती हैं। …

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जल चिकित्सा

जल चिकित्सा                 जल तत्त्व पृथ्वी तत्त्व से हल्का और तरल होता है। अतः धरती पर जल रहता है। पृथ्वी ही उसका आधार होती है। उसका बहाव सदैव नीचे की तरफ होता है। शरीर में गुदा से नाभि तक के भाग में जल तत्त्व की अधिकता होती है। शरीर में जितने तरल पदार्थ होते हैं, जैसे- रक्त, वीर्य, लासिका, मल, …

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पीने योग्य शक्तिवर्धक पानी कैसा हो?

पीने योग्य शक्तिवर्धक पानी कैसा हो? शरीर में जल के कार्यः-                 हवा के पश्चात् शरीर में दूसरी सबसे बड़ी आवश्यकता पानी की होती है। पानी के बिना जीवन लम्बे समय तक नहीं चल सकता। शरीर में लगभग दो तिहाई भाग पानी का होता है। शरीर के अलग-अलग भागों में पानी की आवश्यकता अलग-अलग होती है। जब पानी के आवश्यक …

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स्वास्थ्यरक्षक व्यायाम ‘स्वायसो’

स्वास्थ्यरक्षक व्यायाम ‘स्वायसो’ स्वायसो क्या है?                 स्वायसो एक अत्यन्त सरल एवं अल्प समय में किया जा सकने वाला व्यायाम है। स्वायसो का प्रारम्भ चीन में कुछ दशक पूर्व ही हुआ। इसको बच्चे, युवक, महिलाएँ एवं वृद्ध सभी कर सकते हैं। इसमें किसी प्रशिक्षक की भी आवश्यकता नहीं होती है। बहुत साधारण होते हुए भी सैंकड़ों बीमारियों में यह अत्यधिक …

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