कपिंग चिकित्सा

कपिंग चिकित्सा

                शरीर में बहुत सी मांसपेशियाँ ऐसी होती है, जिनका हलन-चलन इच्छानुसार करना आसान नहीं होता है। ऐसी मांसपेशियों पर हल्का-हल्का मसाज कर विकारों को हटाया जा सकता है। उन विकारों को दूर करने का एक अन्य सरल तरिका और भी है, जो खिंचाव (Suction) के सिद्धान्त पर आधारित होता है। टेनिस की गेंद के दो बराबर भाग करने से कप के आकार के दो भाग हो जाते हैं। उपचार हेतु ऐसे कपों का प्रयोग करने से उपचार की इस विधि को कपिंग चिकित्सा भी कहते हैं।

                किसी भी स्थान की सफाई करने के लिए प्रायः आंगन पर झाड़ू लगाया जाता है। विशेष अवसरों पर अधिक स्वच्छता हेतु आंगन को पानी, साबुन अथवा अन्य रसायनों द्वारा स्वच्छ किया जाता है। परन्तु जहाँ ऐसा करना संभव नहीं होता, वहाँ वायु के दबाव द्वारा सफाई की जाती है। परन्तु आँगन पर बिछे गलीचे, फेल्ट, दरी आदि पर जमीं धूल को हटाने के लिये आजकल वेक्यूम क्लीनर से खिंचाव द्वारा मिट्टी को दूर किया जाता है। इसी प्रकार जिन मांसपेशियों पर विकार जमा हो जाते हैं, वहाँ गेंद के कपों को त्वचा पर रख, दबाने से उनके अन्दर की वायु निकल जाती है। कप के अन्दर शून्यता हो जाने से कप त्वचा पर चिपक खिंचाव पैदा करने लगता है। उस स्थान पर खिंचाव बढ़ने से प्राण ऊर्जा और रक्त का प्रवाह बढ़ने लगता है। अवरोध के कारण रक्तवाहिनियाँ जो सिकुड़ जाती है, पुनः फैलने लगती है। परिणामस्वरूप विजातीय तत्त्व उस स्थान से दूर होने लगते हैं और रोगी स्वस्थ होने लगता है।

                कमर, सीना, घुटनों, हाथ-पैर, एवं अन्य मांसपेशियों सम्बन्धी रोगों में यह उपचार बहुत प्रभावशाली एवं शीघ्र राहत दिलाता है। मेरु दण्ड सम्बन्धी रोग विशेषकर स्लीप डिस्क एवं साईटिका में बहुत लाभदायक होता है। वात संबंधी रोगों में कपिंग उपचार से शीघ्र आराम मिलने लगता है। फंसी हुई वायु अथवा गैस शीघ्र अपना स्थान छोड़ देती है। वात रोगों में कप द्वारा खिंचाव, रोगी को प्राय अच्छा लगता है। जो विजातीय तत्त्व दबाव और मसाज द्वारा दूर नहीं होते हैं, उन्हें दूर करने में खिंचाव से अच्छे परिणाम आते हैं।

                सीने पर इस प्रयोग से फेंफड़े मजबूत होते हैं। उन पर जमा कफ दूर होने लगता है। हृदय और डायाफ%8