स्फटिक (क्रिस्टल)का स्वास्थ्य पर प्रभाव

स्फटिक (क्रिस्टल)का स्वास्थ्य पर प्रभाव


स्फटिक (क्रिस्टल) क्या है?

                स्फटिक क्वार्टज़ वर्ग का विशिष्ठ गुणों वाला पारदर्शक खनिज पत्थर होता है। रासायनिक दृष्टि से यह सिलिका तथा आक्सीजन का योगिक होता है। अपनी विशेष प्रकार की बाह्य, आंतरिक एवं रासायनिक संरचना के कारण इससे निकलने वाली प्रकाश और रंग की किरणें अत्यधिक प्रभावशाली होती है। इसमें ऊर्जा को उत्पन्न करने, संग्रहित कर रखने एवं आवश्यकतानुसार पुनः उपयोग में लेने की क्षमता होती है। हम भलीभांति जानते है कि एक छोटा सा स्फटिक, घड़ी को अपने प्रोगामिंग के अनुसार संचालित करता है। परिणाम स्वरूप घंटे, मिनट, सैकण्ड, तारीख, दिन और महिने का पता लग जाता है। मोबाइल की चिप, पेन ड्राईव में इतनी अधिक सूचनाओं को संग्रहित करना एवं आवश्यकता पड़ने पर पुनः उनका प्रस्तुतिकरण संभव हो सका है। स्फटिक की तुलना एक आज्ञाकारी सहयोगी से की जा सकती है। इसी गुण के कारण घड़ियों, कम्प्युटरों एवं अन्य प्रकार के इलैक्ट्रोमेगनेटिक उपकरणों में सर्वत्र इसका उपयोग हो रहा है। पर्यावरण की सुरक्षा, खाद्य पदार्थो को शुद्ध करने, पानी और हवा के प्रदूषण को दूर करने तथा इलैक्ट्रोमेगनेटिक तरंगों के दुष्प्रभावों की सुरक्षा हेतु स्फटिकों का विविध प्रकार से विश्व व्यापी उपयोग हो रहा है। सारांश में स्फटिक एक आज्ञाकारी नौकर की भांति हमारी कामनाओं की पूर्ति एवं कार्यों में सहयोग करता है।

क्रिस्टल (स्फटिक) चिकित्सा क्या है?

                क्रिस्टल (स्फटिक) द्वारा उपचार करने की पद्धति को क्रिस्टल चिकित्सा कहते हैं। जिस प्रकार जड़ी-बूटियों में प्राणियों को स्वस्थ करने की क्षमता होती है, ठीक उसी प्रकार की स्फटिकों से निकलने वाली तरंगों में भी रोगमुक्त करने की शक्ति होती है। प्राचीन काल से ही विभिन्न राष्ट्रों में रोगोपचार हेतु स्फटिकों का उपयोग होता रहा है। अपने विशेष गुणों के कारण स्फटिक चिकित्सा अत्याधिक प्रभावशाली होती है। इस चिकित्सा से न केवल शारीरिक रोगों का उपचार संभव होता है अपितु मानसिक, भावात्मक एवं आत्मविकार भी दूर होते हैं। स्फटिक द्वारा शरीर में प्रवाहित नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा प्रवाहित की जा सकती है। रोग का एक कारण शरीर के विभिन्न भागों में ऊर्जा के प्रवाह का असंतुलित हो जाना भी होता है। जिससे हमारा आभामण्डल खराब हो जाता है। स्फटिक की तरंगें आभा मण्डल को पुनः व्यवस्थित करने तथा ऊर्जा केन्द्रों को सक्रिय करने में सहयोग करती है, जिससे शरीर में ऊर्जा प्रवाह संतुलित हो जाता है और रोगी रोग मुक्त होने लगता है। उपचार हेतु रोगी की आवश्यकता के अनुरूप स्फटिकों को ऊर्जा चक्रों, पीड़ाग्रस्त भाग पर, कमजोर अंगों पर अथवा शरीर के अन्य स्थानों पर स्पर्श कराया जाता है। परिणामस्वरूप स्फटिकों से निकलने वाली शुभ भावनाओं से संस्कारित तरंगें व्यक्ति के आभामंडल से निकलने वाली तरंगों से सामन्जस्य कर एक रूप कर देती हैं। दोनों में  आपसी तालमेल होने से भौतिक शरीर के साथ-साथ सूक्ष्म शरीर भी प्रभावित होता है। फलतः व्यक्ति का सोच और समझ सही होने लगती है। उसमें सजगता बढ़ने लगती है। नकारात्मक सोच समाप्त होने लगता है और सकारात्मक सोच होने से मनोबल और आत्मबल भी बढ़ने लगता है।

                आभा मंडल का हमारे शरीर, मन, भावनाओं एवं आत्मा से सीधा संबंध होता है। जब इन सभी में अच्छा तालमेल होता है, तब ही हम सच्चे अर्थो में स्वस्थ होते हैं। उस अवस्था में आभामंडल पूर्णतया स्वच्छ, स्पष्ट एवं व्यवस्थित होकर, रोगी के लिए सुरक्षा कवच के रूप में कार्य करने लगता है। दुःखी, चिन्तित, तनावग्रस्त, नकारात्मक सोच वालों, अशांत एवं रोगी व्यक्तियों का आभामंडल अस्त-व्यस्त होता है। स्पष्ट, स्वच्छ और एक जैसा नहीं होता। स्फटिकों के इस विशिष्ट गुण के कारण ही स्वास्थ्य के क्षेत्र में ऊर्जा प्रदान करने वाली एनर्जी स्टीक जैसे उपकरणों में विभिन्न प्रकार के क्रिस्टल पाउडरों का उपयोग विशेष रूप से होने लगा है। स्फटिकों में प्रातःकालीन सूर्य से निकलने वाले इन्फ्रारेड (Infrared) किरणों को अपने में संग्रहित कर सुरक्षित रखने की अपूर्व क्षमता होती है। स्फटिकों की तरंगें मोबाइल, टी.वी., कम्प्युटर, एक्स रे, सोनोग्राफी, सी.टी.स्केन और बिजली के टावरों से निकलने वाली हानिकारक तरंगों के दुष्प्रभावों को नियंत्रित रखती है। शराब, तम्बाकू, दवाओं ओर अखाद्य पदार्थो से पड़ने वाले दुष्प्रभावों को कम करने में मदद करती है।

                रत्नों की भांति अलग-अलग प्रकार के स्फटिकों का, उनके रंग, आकार, माप, संस्कारित करने के ढंग एवं रोगी की मानसिकता के अनुरूप एवं शरीर में किस स्थान पर प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से उसकी तरंगों का आभा मंडल की तरंगों से सम्पर्क हो रहा है, पर प्रभाव निर्भर करता हैं। विदेशों में बहुत से शल्य चिकित्सक शल्य चिकित्सा करने से पूर्व एवं बाद में घाव को जल्दी भरने हेतु क्रिस्टलों को उपयोग में लेते हैं। स्फटिक चिकित्सा पूर्णतः अहिंसक है तथा वैकल्पिक चिकित्सा नहीं है, परन्तु अपने आप में समग्र चिकित्सा है। जिससे शारीरिक, मानसिक, पुराने अथवा संक्रामक आदि सभी रोगों का उपचार प्रभावशाली ढंग से किया जा सकता है।

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