रोग अनेक – समाधान सिर्फ एक

रोग अनेक – समाधान सिर्फ एक


                शरीर में रोग होने के कारणों में से इलैक्ट्रोनिक उपकरणों से निकलने वाले Radiations का दुष्प्रभाव भी एक प्रमुख कारण होता है। मोबाइल, टी.वी., एक्स-रे, इन्टरनेट, कम्प्युटर आदि उपकरणों के बढ़ते उपयोग एवं उनको संचालित करने वाले टावरों के कारण वायुमण्डल में फैले इस प्रदूषण का नियन्त्रण जनसाधारण के हाथ में नहीं है। ये Radiations शरीर की कोशिकाओं के लिए अत्यधिक हानिकारक होते हैं।

                इन Radiations का प्रदूषण मानव शरीर के जिस भाग की कोशिकाओं को निशाना बनाता है, उस भाग की कोशिकाएँ अस्वस्थ होने लगती है और उसका परिणाम भिन्न-भिन्न रोगों के रूप में सामने आता है। आधुनिक स्वास्थ्य वैज्ञानिकों के अनुसार मानव शरीर का निर्माण लगभग 60,000,000,000,000 (60 बिलियन) कोशिकाओं से मिलकर हुआ है। शरीर में कोशिकाएँ जितनी स्वस्थ होती है उतना ही व्यक्ति स्वस्थ होता है। कोशिकाएँ जितनी ज्यादा अस्वस्थ होती है तो शरीर भी अस्वस्थ, कोशिकाएँ वृद्ध तो शरीर वृद्ध और कोशिकाओं की मृत्यु होने पर शरीर की भी मृत्यु हो जाती है।

                पृथ्वी में चुम्बकीय तत्त्व होने के कारण इस पर रहने वाले प्रत्येक जीव का शरीर के चारों तरफ चुम्बकीय सुरक्षा कवच बन जाता है, जो हमारी सभी प्रकार के प्रदूषणों से रक्षा करता है। परन्तु आज के युग में लोहे के अत्यधिक उपयोग से पृथ्वी के चुम्बक का आंशिक प्रभाव ही हमारे शरीर पर पड़ता है। दूसरी तरफ Radiations के साधनों के बढ़ जाने से सभी प्राणियों का चुम्बकीय सुरक्षा कवच प्रायः अस्त-व्यस्त होता है और इन Electronic Radiations का दुष्प्रभाव हमारे शरीर पर पड़ने लगता है।

                हमारे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता (Defense System) ही हमारे शरीर का सबसे बड़ा चिकित्सक होती हैं और उसको प्राप्त करने का सरल उपाय है ‘‘एनर्जी स्टीक’’। एनर्जी स्टीक के अन्दर विविध प्रकार के स्फटिक पाउडर वाले खनिज तत्त्वों को एक पेन के आकार की स्टेनलेश स्टील Body में भरा जाता है। स्फटिक पाउडर से निकलने वाली तरंगे अपने गुणों के अनुसार शरीर पर अपना प्रभाव डालने लगती है। आज अधिकांश घड़ियों, कम्प्युटरों तथा इलैक्ट्रोनिक उपकरणों में स्फटिक का प्रयोग हो रहा है। एनर्जी स्टीक को शरीर पर घूमाने अथवा रगड़ने से शरीर की कोशिकाओं को, उनके अधिकतम स्तर तक चार्ज होने में मदद मिलती है और शरीर में प्राण ऊर्जा का स्तर बढ़ जाता है। परिणामस्वरूप शरीर के सभी अंग अपनी पूर्ण क्षमता से कार्य करने लगते हैं तथा रोग दूर होने लगता हैं। एनर्जी स्टीक के प्रयोग द्वारा शरीर के कमजोर कोष शक्तिशाली बनने लगते हैं, अस्वस्थ कोष स्वस्थ होने लगते हैं एवं स्वस्थ कोष संतुलित व शक्तिशाली बनकर नव सर्जन के कार्य को बनाए रखते हैं। एनर्जी स्टीक के प्रयोग द्वारा कोशों को गति, शक्ति, संतुलन व स्वस्थता प्राप्त होती है। यह एनर्जी स्टीक माईक्रों सिस्टम पर काम करती है अर्थात् इसके द्वारा घंटों का काम मिनटों में हो जाता है व कम से कम समय में जल्दी ही आराम मिल जाता है। इस एनर्जी स्टीक से प्रयोग से किसी भी प्रकार के दुष्प्रभाव की संभावना नहीं रहती है।

एनर्जी स्टीक के लाभ-

                किसी पदार्थ पर इस स्टीक को कुछ देर घुमाने से वह पदार्थ चार्जड हो जाता है। जैसे पानी के ऊपर घूमाने से पानी, जमीन पर घूमाने से जमीन चार्जड हो जाती है। एनर्जी स्टीक द्वारा चार्जड पानी का घूट पीते ही शरीर का आभा मण्डल व्यवस्थित होने लगता है और इन Electronic Radiation के लिए सुरक्षा कवच बन जाता है। जिससे शरीर में तुरन्त शक्ति आ जाती है। भूमी को चार्जड कर उस पर खड़ा होने से भी शरीर में शीघ्र शक्ति का संचार अनुभव किया जा सकता है। खाने-पीने की सभी वस्तुओं को चार्जड करने में उनमें ऊर्जा बढ़ जाती है। जिस प्रकार फिटकरी को पानी में डालने से उसकी गंदगी अलग हो नीचे बैठ जाती है, उसी प्रकार जिन पदार्थो पर इसकी तरंगे स्पर्श करती है उनकी अशुद्धता दूर होने लगती है और वे पदार्थ पौष्टिक बन जाते हैं। अतः एनर्जी स्टीक का सरल प्रयोग व्यक्तियों को, खाने-पीने की चीजों को व वातावरण को शुद्ध, संतुलित व शक्तिशाली बनाने के लिए किया जा सकता है।

  1. इस एनर्जी स्टीक का प्रयोग इतना सरल व आसान है कि कोई भी, किसी भी उम्र का व्यक्ति, कहीं भी, कभी भी इसके प्रयोग द्वारा लाभ प्राप्त कर सकता है अथवा करवा सकता है।
  2. इसके उपयोग के लिए किसी भी प्रकार के पावर या बैटरी की आवश्यकता नहीं होती है।
  3. एनर्जी स्टीक के प्रयोग द्वारा व्यक्ति स्वस्थ, संतुलित व शक्तिशाली बनने लगता है, जिससे प्रत्येक क्षेत्र में सफल, समृद्ध, सुरक्षित व प्रगतिशील होता है।
  4. एनर्जी स्टीक से प्राकृतिक शक्तियाँ उत्पन्न और उत्तेजित होने लगती है, जिससे दवा एवं उपचार से बचने की संभावनाएँ बढ़ जाती है।
  5. चन्द मिनटों तक इसे कमरे या हाॅल में घूमाने से कमरे का वातावरण शुद्ध एवं स्वास्थ्यवर्धक बन जाता है, जिसका कम ज्यादा लाभ वहाँ उपस्थित व्यक्तियों को मिलता है।
  6. प्रयोग करते समय किसी की प्रार्थना या संकल्प करने की भी आवश्यकता नहीं होती है।
  7. एनर्जी स्टीक के प्रयोग से शरीर में पानी के परमाणु क्रियाशील होते हैं। उनकी संरचना बदल जाती है और वह द्रव ऊर्जावान हो जाता है। विजातीय तत्त्व दूर होने लगते हैं जिससे रक्त प्रवाह बराबर होने लगता है। कोलेस्टाॅल नहीं बढ़ता और हृदय शक्तिशाली होने लगता है।
  8. एनर्जी स्टीक के प्रयोग से शरीर में आॅक्सीजन का स्तर बढ़ने लगता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने लगती है। शरीर को ताकत मिलती है। नाड़ी संस्थान बराबर कार्य करने लगता है। शरीर में आम्लिक स्तर कम होने लगता है। मांसपेशियों के लचीलापन बढ़ने लगता है। अनावश्यक चर्बी को घटाकर शरीर का वजन नियन्त्रित करती है।
  9. एनर्जी स्टीक द्वारा चार्जड क्षेत्र में ध्यान और साधना करने से मन एकाग्र होने में मदद मिलती है।
  10. एनर्जी स्टीक द्वारा चार्जड पानी द्वारा सिंचाई करने से वृक्ष, पौधे 20 प्रतिशत से 40 प्रतिशत अधिक शीघ्रता से बढ़ने लगते हैं।
  11. एनर्जी स्टीक के नियमित प्रयोग से संक्रामक रोगों एवं वायरस के दुष्प्रभावों से सुरक्षा होती है।
  12. एनर्जी स्टीक का प्रयोग जानवरों को खिलाने वाले खाद्य पदार्थो एवं पीने के पानी पर करने से उनका आहार पोष्टिक बन जाता हैं एवं उनका स्वास्थ्य अच्छा रहने लगता है तथा जानवरों का उपचार भी सरलता पूर्वक प्रभावशाली ढंग से किया जा सकता है।

                एनर्जी स्टीक से कुछ देर तक पानी को चार्जड कर उस पानी का गंडूस करने से दांतों के रोगों में, त्वचा पर ऐसे पानी का हल्का-हल्का मसाज करने से दाद, खुजली एवं त्वचा संबंधी अन्य रोगों में राहत मिलती है। इस पानी को पीने से एलर्जी ठीक होती है और आँखें धोने से आँखों की रोशनी सुधरने लगती है।

                विभिन्न रोगों में उपचार की अवधि रोगी के शरीर में सक्रिय एवं निष्क्रिय कोशिकाओं की अवस्था पर निर्भर करती है। छोटे बच्चों को उपचार थोड़ा, युवाओं को उससे ज्यादा तथा वृद्धों के लिए और अधिक करना चाहिए क्योंकि उस अवस्था में नवीन कोशिकाओं का निर्माण बहुत कम होने लगता है।

एनर्जी स्टीक द्वारा रोगोपचार की विधि

                उपचार के पूर्व व्यक्ति को 2-3 घूंट एनर्जी स्टीक से चार्जड पानी अवश्य पीना चाहिए एवं 5-7 गहरे पूर्ण श्वास लेना चाहिए। सर्व प्रथम इस स्टीक का प्रयोग सात ऊर्जा चक्रों अथवा शरीर में जहाँ-जहाँ अन्तःश्रावी ग्रन्थियाँ है, वहाँ पर नजदीक से घूमाकर करना चाहिए। उसके पश्चात् शरीर के जितने भी हाथ और पैर के प्रमुख जोड़ एवं अंगुलियों तथा अंगूठों के अतिंम सिरे पर करना चाहिए। उसके पश्चात् आँख, कान, नाक, मुँह, गले, हथेली और पगथली के आगे-पीछे एवं शरीर के सभी अंगों पर अर्थात् हृदय, फेंफड़ों, तिल्ली, लीवर, गुर्दों, आमाशय, पित्ताशय, छोटी एवं बड़ी आंत, मूत्राशय एवं पूरी रीढ़ की हड्डी पर करना चाहिए। उसके पश्चात् कमजोर अथवा रोगग्रस्त भाग पर पांच-पांच मिनट के अन्तराल में 3-4 बार करना चाहिए। उसके पश्चात् पूरे शरीर के चारों तरफ एनर्जी स्टीक को कुछ बार घुमाना चाहिए। उपरोक्त विधि से उपचार दिन में कम से कम 3-4 बार करना चाहिए। पुराने एवं हठीले रोगों में दर्दस्थ एवं कमजोर भाग पर जितना अधिक उपचार किया जायेगा परिणाम उतने ही शीघ्र प्रायः मिलते हैं। उपचार करते समय आंखें बंद हों और ध्यान में एकाग्रता हों तो सभी रोगों में अपेक्षाकृत जल्दी परिणाम आते हैं।

                एनर्जी स्टीक द्वारा शरीर पर धीरे-धीरे मसाज करने से उन अंगों की कोशिकाएँ सक्रिय होने लगती है और वह अंग पूर्ण क्षमता से कार्य करने लगता है। हथेली और पगथली पर मसाज करने से एक्युप्रेशर चिकित्सा का लाभ मिलने लग जाता है। किसी पदार्थ को चार्जड करते समय स्टीक जितनी नजदीक होती है एवं किस गति से उसे घुमाया जाता है, उसके अनुसार उसका प्रभाव पड़ता है। एनर्जी स्टीक को अपने पास रखने से व्यक्ति की सोच सकारात्मक होने लगती हैं। स्वभाव में चिड़चिड़ापन समाप्त हो जाता है। एनर्जी स्टीक को शक्तिशाली मंत्रों द्वारा भावित करने, पिरामीड क्षेत्र में रखने से उसकी प्रभावशालीता और अधिक बढ़ जाती है। चाहे केंसर हो या हृदयघात, दमा हो या मधुमेह, एलर्जी हो या सूजन इसके विधिवत् प्रयोग से सन्तोषजनक लाभ होता है। इस प्रकार एनर्जी स्टीक को अपना डाॅक्टर कहें अथवा चलता फिरता बिना डाॅक्टर का अस्पताल कहें तो कोई अतिश्योक्ति नहीं।

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