21 नवंबर 2025 से भारत में श्रम कानूनों का एक बड़ा बदलाव शुरू हो रहा है। श्रम और रोजगार मंत्रालय ने चार नए श्रम कोड लागू करने की घोषणा की है, जो 29 पुराने केंद्रीय श्रम कानूनों को बदल देंगे। इसका सबसे बड़ा असर आम नौकरी करने वालों की टेक-होम सैलरी पर पड़ने वाला है। अगर आपका बेसिक पे अभी 30-40% है, तो अगले साल से यह 50% हो जाएगा — और इसके साथ ही आपकी जेब से निकलने वाली PF और ग्रेचुइटी की रकम बढ़ जाएगी। नतीजा? अभी के लिए आपका बक्सा कम होगा, लेकिन बूढ़े होने पर आपको ज्यादा मिलेगा।
क्या बदल रहा है? बेसिक पे का नया नियम
अब से हर नौकरी के वेतन में बेसिक पे कम से कम 50% होना अनिवार्य हो गया है। यानी अगर कोई कर्मचारी 25,000 रुपये महीना कमा रहा है, तो उसका बेसिक पे अब 12,500 रुपये से कम नहीं हो सकता। पहले बहुत से कंपनियां बेसिक पे कम रखकर HRA, बोनस, अलाउंस ज्यादा देती थीं — जिससे PF और ग्रेचुइटी की गणना कम होती थी। अब ऐसा नहीं होगा।
यह बदलाव सिर्फ बेसिक पे के लिए नहीं, बल्कि सभी सांविधिक लाभों — जैसे ओवरटाइम, छुट्टी एनकैशमेंट, ESI, बोनस — के लिए भी लागू होगा। BDO India के अनुसार, इससे कंपनियों का कर्मचारी लागत 15-25% तक बढ़ सकता है। लेकिन सरकार का दावा है कि यह बदलाव लंबे समय में मजदूरों की सुरक्षा को मजबूत करेगा।
PF और ग्रेचुइटी में कितनी बढ़ोतरी होगी?
PF की दर 12% है — जो कि अब बेसिक पे पर लगेगी। अगर आपका बेसिक पे 8,000 रुपये से बढ़कर 12,500 रुपये हो गया, तो आपका PF योगदान 960 रुपये से बढ़कर 1,500 रुपये हो जाएगा। नौकरी देने वाला भी उतना ही देगा। यानी आपके खाते में 3,000 रुपये का जमा होगा, जो पहले से 1,200 रुपये ज्यादा है।
ग्रेचुइटी भी अब बेसिक पे पर आधारित होगी। एक वर्ष के लिए 15 दिन का वेतन मिलता है। अगर आपका अंतिम बेसिक 12,500 रुपये है, तो हर साल आपको ग्रेचुइटी में 6,250 रुपये मिलेंगे। पहले जहां यह संभवतः 4,000-4,500 रुपये था, वहां अब यह लगभग 50% बढ़ जाएगा।
इसका मतलब? एक कर्मचारी जिसका बेसिक पे 10,000 रुपये से बढ़कर 15,000 रुपये हो गया है, उसकी टेक-होम सैलरी शुरुआत में 2,000-3,000 रुपये तक कम हो सकती है। लेकिन 15 साल बाद, उसका PF खाता और ग्रेचुइटी बैलेंस लगभग 15-20 लाख तक पहुंच सकता है — जो पहले नहीं होता था।
किन कर्मचारियों को सबसे ज्यादा असर होगा?
यह बदलाव ज्यादातर उन लोगों को छूएगा जिनका बेसिक पे अभी 40% से कम है — जैसे टेक्नोलॉजी कंपनियों, एचआर फर्म्स, और बड़े बैंकों में काम करने वाले। छोटे उद्यम, जहां बेसिक पे पहले से 50% से ऊपर होता है, उन पर असर कम होगा।
लेकिन यहां एक बड़ा बदलाव और है: गिग वर्कर्स — जैसे ज़ोमैटो, डिलीवरी बॉय, ऑल इंडिया टैक्सी ड्राइवर — अब श्रम सुरक्षा के दायरे में आ गए हैं। वे भी PF, ग्रेचुइटी और बीमा के लिए योग्य होंगे। यह भारत में पहली बार है जब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने वालों को सांविधिक सुरक्षा मिल रही है।
अन्य महत्वपूर्ण बदलाव
- छुट्टी की शर्त: वार्षिक छुट्टी के लिए अब 240 दिन काम करना जरूरी नहीं — 180 दिन काफी होंगे।
- ओवरटाइम: अतिरिक्त घंटों के लिए वेतन दोगुना होगा।
- नौकरी छोड़ने पर: अगर कंपनी किसी को बर्खास्त करती है, तो उसे रिस्किलिंग फंड में 15 दिन के अंतिम वेतन का योगदान देना होगा।
- महिलाएं: अब रात के समय भी महिलाएं सभी स्थानों पर काम कर सकेंगी — बशर्ते सुरक्षा, CCTV और सुरक्षित परिवहन उपलब्ध हो।
- वेतन देने की समय सीमा: हर महीने की 7 तारीख तक वेतन देना अनिवार्य हो गया है।
क्या नौकरी खतरे में है?
कुछ छोटी कंपनियां डर रही हैं। बढ़ी हुई लागत के कारण वे नौकरियां काट सकती हैं। लेकिन सरकार ने रिटेंचमेंट के लिए लागू होने वाली सीमा 100 से बढ़ाकर 300 कर्मचारी कर दी है — यानी छोटे और मध्यम आकार के उद्यमों को अब अधिक लचीलापन मिला है।
साथ ही, नेशनल फ्लोर वेज की घोषणा की गई है — यानी कोई भी मजदूर इस न्यूनतम वेतन से कम नहीं कमा सकता। इसका मतलब है कि ग्रामीण क्षेत्रों और अनौपचारिक क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों को भी न्यूनतम जीवन योग्य वेतन मिलेगा।
क्या अभी करना होगा?
नौकरी देने वालों को अगले 10 महीने में अपनी सैलरी स्ट्रक्चर बदलनी होगी। एचआर टीम्स को अपने पेबैल टूल्स, कॉन्ट्रैक्ट्स और वेंडर मॉडल्स को अपडेट करना होगा। बहुत सी कंपनियां अभी से अपने कर्मचारियों को समझा रही हैं कि टेक-होम सैलरी कम होगी, लेकिन भविष्य में बहुत कुछ मिलेगा।
एक बात ध्यान रखें: यह बदलाव ज्यादातर अनुशासन और लंबी अवधि की सुरक्षा के लिए है। जैसे कि एक बच्चे को अभी उसकी जेब का पैसा नहीं देना, लेकिन उसके लिए एक बड़ा बचत खाता खोलना।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या टेक-होम सैलरी में कमी होने से मेरी जिंदगी पर असर पड़ेगा?
हां, शुरुआत में आपकी जेब में 10-15% कमी हो सकती है — खासकर अगर आपका बेसिक पे 40% से कम है। लेकिन यह कमी सिर्फ अभी के लिए है। अगले 5-10 साल में आपका PF और ग्रेचुइटी बैलेंस बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा, जिससे आपकी बूढ़ापे की सुरक्षा मजबूत होगी।
क्या गिग वर्कर्स को भी ये लाभ मिलेंगे?
हां, यह एक बड़ी बदलाव है। ज़ोमैटो, ऑल इंडिया टैक्सी, फूड डिलीवरी वर्कर्स अब PF, ग्रेचुइटी और बीमा के लिए योग्य होंगे। इनका योगदान कंपनी और वर्कर दोनों द्वारा किया जाएगा। यह भारत में पहली बार है जब डिजिटल इकोनॉमी के कर्मचारियों को सांविधिक सुरक्षा मिल रही है।
क्या छोटे उद्यमों के लिए यह बोझ बन जाएगा?
हां, कुछ छोटे उद्यमों के लिए लागत बढ़ने से चुनौती होगी। लेकिन सरकार ने रिटेंचमेंट के लिए सीमा 100 से बढ़ाकर 300 कर्मचारी कर दी है, जिससे छोटे उद्यमों को अधिक लचीलापन मिला है। इसके अलावा, रिस्किलिंग फंड की आवश्यकता केवल बड़े उद्यमों के लिए है।
क्या महिलाएं रात में काम कर सकेंगी?
हां, अब सभी स्थानों पर महिलाएं रात में काम कर सकेंगी — बशर्ते कंपनी सुरक्षा, CCTV, और सुरक्षित परिवहन की व्यवस्था करे। यह नियम गैर-संगठित क्षेत्रों में भी लागू होगा, जिससे महिलाओं के लिए नौकरी के अवसर बढ़ेंगे।
क्या बेडी और सिगरेट मजदूरों को भी लाभ मिलेगा?
हां, इन मजदूरों को अब न्यूनतम वेतन की गारंटी मिलेगी, और उनका काम का समय 8-12 घंटे तक सीमित होगा। वे 30 दिन काम करने के बाद बोनस के योग्य होंगे। यह पहले से अलग है — अब इन अनौपचारिक क्षेत्रों के लोगों को भी श्रम कानूनों की सुरक्षा मिल रही है।
क्या यह बदलाव नौकरियों को कम कर देगा?
शुरुआत में कुछ कंपनियां लागत बढ़ने के कारण नौकरियां कम कर सकती हैं। लेकिन लंबे समय में, यह बदलाव अनौपचारिक क्षेत्र को संगठित करेगा, जिससे नए नौकरी के अवसर बनेंगे। जैसे गिग वर्कर्स के लिए बीमा और PF के लिए नए प्लेटफॉर्म बनेंगे।