छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने लॉन्च किया ऑनलाइन आरटीआई पोर्टल, 300 न्यायिक कर्मियों को प्रमोशन

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने लॉन्च किया ऑनलाइन आरटीआई पोर्टल, 300 न्यायिक कर्मियों को प्रमोशन

छत्तीसगढ़ के रायपुर में गुरुवार, 5 सितंबर 2024 को, मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने एक ऐसा कदम उठाया जो नागरिकों की ज़िंदगी बदल सकता है — छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने अपना ऑनलाइन आरटीआई वेब पोर्टल शुरू किया। ये पोर्टल, जिसका नाम ‘Online RTI Information System’ है, अब राज्य के सभी जिला अदालतों के साथ जुड़ गया है। अब आप दुनिया के किसी भी कोने से, बस एक क्लिक से, सरकारी दस्तावेजों की मांग कर सकते हैं — और उसकी स्थिति रियल-टाइम में ट्रैक कर सकते हैं। ये सिर्फ एक टेक्नोलॉजी अपग्रेड नहीं, बल्कि नागरिक शक्ति का एक नया युग है।

पारदर्शिता का नया रूप

पहले आरटीआई आवेदन के लिए आपको अदालत या विभाग में जाना पड़ता था। फाइलें खो जाती थीं, जवाब आने में महीनों लग जाते थे। अब ये सब बदल गया है। इस नए पोर्टल पर आवेदन भरना, शुल्क भुगतान करना, और अपील दायर करना — सब कुछ ऑनलाइन हो गया है। भुगतान के लिए नेट बैंकिंग, UPI, डेबिट या क्रेडिट कार्ड का विकल्प मिलता है। एक इंटरैक्टिव मैप आपको बताता है कि आपका आवेदन किस विभाग में पहुँचा है। ये न सिर्फ समय बचाता है, बल्कि भ्रष्टाचार के रास्ते भी बंद कर देता है।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने शुभारंभ के दौरान कहा, ‘यह पोर्टल सिर्फ एक टूल नहीं, बल्कि एक वादा है — नागरिक की आवाज़ सुनने का वादा।’ उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इसका उद्देश्य बस डिजिटलीकरण नहीं, बल्कि जवाबदेही की संस्कृति को बढ़ावा देना है।

300 न्यायिक कर्मियों को प्रमोशन: एक अनपेक्षित मोड़

लेकिन ये सब इतना ही नहीं। अगले साल, 30 अक्टूबर 2025 को, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने 300 न्यायिक कर्मियों को प्रमोशन देने का फैसला किया है — और ये प्रमोशन इसी ऑनलाइन पोर्टल के लॉन्च से जुड़ा है। ये एक अनूठी बात है। आमतौर पर प्रमोशन नियमित सेवा अवधि या वरिष्ठता के आधार पर होते हैं। लेकिन यहाँ, एक डिजिटल पहल के लिए एक बड़ी नौकरशाही सुधार की पहचान की गई है।

ये निर्णय एक संकेत है कि सुप्रीम कोर्ट के 2023 के निर्देशों का असली मतलब समझा जा रहा है। उस वक्त, सुप्रीम कोर्ट ने सभी उच्च न्यायालयों से आरटीआई के लिए ऑनलाइन सिस्टम बनाने को कहा था। छत्तीसगढ़ ने न सिर्फ उसे पूरा किया, बल्कि उसे एक नीति के रूप में भी दर्ज कर दिया।

देश भर में चल रही डिजिटल लहर

छत्तीसगढ़ की ये पहल अकेली नहीं है। गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने पहले ही अपना पोर्टल लॉन्च किया है, जिसमें भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों के नागरिक भी ऑनलाइन आवेदन दे सकते हैं। मद्रास उच्च न्यायालय ने 25 जुलाई 2025 को अपना पोर्टल शुरू किया। अब तक लगभग 18 उच्च न्यायालयों ने अपना ऑनलाइन आरटीआई सिस्टम लागू कर दिया है।

लेकिन अब केंद्र सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। 16 जून 2025 से, आरटीआई आवेदन के लिए ईमेल OTP वेरिफिकेशन अनिवार्य हो गया है। ये निर्णय कार्मिक विभाग ने लिया है — ताकि कोई भी फर्जी आवेदन न दाखिल हो सके। अब आपको अपने ईमेल पर भेजा गया एक बार का कोड डालना होगा, वरना आवेदन स्वीकार नहीं होगा। ये सुरक्षा का एक बड़ा कदम है।

क्यों ये सब इतना मायने रखता है?

क्यों ये सब इतना मायने रखता है?

कल्पना कीजिए — एक गाँव की एक महिला, जिसके पास न कोई कार है, न इंटरनेट, लेकिन उसके पास एक स्मार्टफोन है। वो अपने बेटे की शिक्षा के लिए सरकारी स्कूल के बजट की जानकारी चाहती है। पहले, वो शहर जाने के लिए बस का टिकट खरीदती, घंटों लाइन में खड़ी होती, और शायद जवाब नहीं पाती। अब, बस एक ऐप खोलती है, एक क्लिक करती है, और अपने आवेदन की स्थिति देखती है। ये सिर्फ तकनीक नहीं, ये न्याय का एक नया रूप है।

और ये बदलाव निर्माण नहीं, बल्कि नागरिक के अधिकार की असली शक्ति को जीवित करना है। आरटीआई अधिनियम 2005 का मूल उद्देश्य यही था — शक्ति को जनता के हाथों में लौटाना। अब, वो उद्देश्य डिजिटल रूप में जीवित हो रहा है।

आगे क्या होगा?

अब तक के अनुभव से ये साफ है कि जहाँ ऑनलाइन पोर्टल लागू हुए, वहाँ आरटीआई आवेदनों की संख्या 40-60% तक बढ़ गई है। जवाब देने का औसत समय भी 30 दिनों से घटकर 12 दिन हो गया है। अगला चरण क्या होगा? शायद आरटीआई आवेदनों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा स्वचालित रूप से विभागों में रीडायरेक्ट करना। या फिर, आवेदनों की नियमित रिपोर्टिंग को ऑटोमेट करना।

एक बात स्पष्ट है — जब न्यायपालिका खुद डिजिटल बदलाव की नेतृत्व करे, तो अन्य विभाग भी पीछे नहीं रह सकते। छत्तीसगढ़ का ये कदम, शायद, देश के अन्य राज्यों के लिए एक नया मानक बन जाएगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या आरटीआई आवेदन के लिए अब ओटीपी अनिवार्य है?

हाँ, 16 जून 2025 से केंद्र सरकार ने सभी ऑनलाइन आरटीआई आवेदनों के लिए ईमेल OTP वेरिफिकेशन अनिवार्य कर दिया है। आपको www.rtionline.gov.in पर आवेदन करते समय अपने ईमेल पर भेजे गए एक बार के कोड का उपयोग करना होगा, वरना आवेदन स्वीकार नहीं होगा। ये सुरक्षा के लिए है, ताकि कोई फर्जी आवेदन न दाखिल हो सके।

छत्तीसगढ़ का आरटीआई पोर्टल अन्य राज्यों से कैसे अलग है?

छत्तीसगढ़ का पोर्टल अन्य राज्यों के साथ तकनीकी रूप से समान है, लेकिन इसकी विशेषता यह है कि इसके लॉन्च के साथ ही 300 न्यायिक कर्मियों को प्रमोशन दिया गया है। ये एक ऐसा संकेत है कि डिजिटल सुधार को सिर्फ तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि प्रशासनिक उपलब्धि माना जा रहा है।

क्या ग्रामीण इलाकों में लोग इस पोर्टल का उपयोग कर पाएँगे?

हाँ, क्योंकि इस पोर्टल का डिज़ाइन मोबाइल-फ्रेंडली है और यह सिर्फ इंटरनेट कनेक्टिविटी पर निर्भर करता है, न कि डेस्कटॉप कंप्यूटर पर। ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्मार्टफोन का उपयोग बढ़ रहा है। अदालतें अब ग्राम पंचायतों में डिजिटल सहायता केंद्र भी लगा रही हैं, जहाँ लोग आवेदन करने में मदद ले सकते हैं।

आरटीआई शुल्क कितना है और कैसे भुगतान करें?

आरटीआई आवेदन के लिए 10 रुपये शुल्क है। इसे नेट बैंकिंग, UPI, डेबिट या क्रेडिट कार्ड के माध्यम से ऑनलाइन भुगतान किया जा सकता है। कुछ राज्यों में पोस्टल ऑर्डर भी स्वीकार किए जाते हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ के पोर्टल पर केवल डिजिटल भुगतान संभव है।